शुक्रवार, 14 नवंबर 2008

नन्ही परियाँ

अपने मन की,
बात बतायें
परीलोक में,
हम चढ़ जाएँ


लायें वहाँ से,
नन्ही परियाँ
देख जले फिर,
सारी दुनिया


हम परियों के,
साथ में खेलें
अम्मा-दीदी,
रोटियाँ बेलें


भूख लगे तब,
घर पर आयें
साथ बैठकर,
खाना खायें


संध्या को वे,
गाना गायें
थपकी देकर,
हमें सुलायें

- विजय तिवारी " किसलय

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