स रल, सरस, मधुमय वाणी से,
................... जिनके हृदय सुशोभित हों।
रो ज खुशी की भोर हो ऐसी,
.................... सबके मन आलोकित हों॥
ज ग में जन्म मिला है तो हम,
..................... मानव हित के कर्म करें।
ठा नें हम परहित करने की,
..................... कहीं कभी न शर्म करें॥
कु न्दन ज्यों तप-तप कर निखरे,
................... त्यों कर्मों से खुशी मिले।
र हते जो " संतोषी " बनकर,
................. उनके तन-मन दिखें खिले॥























