रविवार, 26 अक्तूबर 2008

पूजा का ढोंग


पूजा का ढोंग
दीपक की नन्ही सी किरण भी,
-------- अन्धकार हर लेती है ।
पावनता भी मैले मन को,
------- निज समान कर देती है ॥
ह पूजा का ढोंग है जिसमें ,

------- स्वार्थ भावना आ जाए ।
लीन न हों उस भाव में जिसका ,
------- अंत निकट ही दिखलाये ॥
- विजय तिवारी " किसलय "

1 टिप्पणी: