गुरुवार, 23 अक्तूबर 2008

आतंकवाद



आतंकवाद


लूटकर

चैन

हड़पकर

खुशियाँ

आतंकवादी

बढ़ रहे


और हम हैं कि

शंतिमार्ग

पर

चल रहे .....


- विजय तिवारी " किसलय "

1 टिप्पणी: