बुधवार, 29 अक्तूबर 2008

खुशहाली का पाठ

प्रीति करो सब मिलजुल कर नित,
...... इसमें कभी न होता घाटा ।
तिल-तिल तेल जला ज्यों दीपक,
....... सारे घर का तिमिर हटाता ।

दुखता है मन कड़वाहट से ,
.......... मृदुवाणी स्नेह बढाती ।
बेशक यही भावना जग में,
...... खुशहाली का पाठ पढाती

-डॉ. विजय तिवारी " किसलय "

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