मंगलवार, 14 अक्तूबर 2008

राधा नीर बहाए


राधा नीर बहाए

व्याकुल बिरहन मन को दुखाए

पलकों में वो रैन बिताए

दिन में डगर निहारे

सबसे पूछे कब आएँगे

बृज अरविंद हमारे

आश् -निराश भरी राधा को

हर सखि धीर बँधाए

राधा नीर बहाए

व्याकुल बिरहन मन को दुखाए


कुंज गलिन में राधा टेरे

आओ कुंज बिहारी

तुम बिन सारी गोकुल सूनी

सूनी "रहस" हमारी

नेह लगाकर सुधि बिसराई

और हो गये पराए

राधा नीर बहाए

व्याकुल बिरहन मन को दुखाए

- डॉ. विजय तिवारी "किसलय"

जबलपुर

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