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गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

आचार्य कृष्ण कान्त चतुर्वेदी म.प्र.शासन द्वारा "राज शेखर सृजन पीठ" के प्रमुख नियुक्त

 जबलपुर संस्कारधानी के प्रकाण्ड विद्वान्वरिष्ठ साहित्यकार, मध्य प्रदेश कालिदास अकादमी के पूर्व निदेशक, रानी दुर्गावती विश्व विद्यालय के प्राकृत तथा संस्कृत विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष अप्रतिम प्रतिभावान आचार्य कृष्ण कान्त चतुर्वेदी जी को
को संस्कृति विभाग म.प्र.शासन द्वारा नई गठित "राज शेखर सृजन पीठ" मध्य प्रदेश का प्रमुख नियुक्त किया गया है. जबलपुर  में स्थापित होने वाली इस सृजन पीठ से निश्चित रूप से संस्कृत, संस्कृति एवं साहित्य के क्षेत्र में मध्य प्रदेश के साथ ही जबलपुर विशेष रूप से  लाभान्वित होगा.

           व्यक्तिगत रूप से मेरी ख़ुशी  कई  गुनी इस लिए  भी  बढ़ गई है कि  मैं कलचुरी इतिहास की  उस राजधानी "त्रिपुरी" वर्तमान भेड़ाघाट रोड  तेवर  का मूल निवासी हूँ जहाँ पर काफी समय तक  रहकर स्वयं पं.राजशेखर ने संस्कृत साहित्य व ग्रंथों का सृजन किया था.

    "हिंदी साहित्य संगम जबलपुर" सहित जबलपुर  के साहित्य जगत की ओर  से मैं  आचार्य कृष्ण कान्त चतुर्वेदी जी को हार्दिक बधाई  देता हूँ.


प्रस्तुति:-  

- डॉ. विजय तिवारी "किसलय" जबलपुर

रविवार, 22 मई 2011

एक ख़ुशी- एक ग़म


       प्रो. अरुण दिवाकर नाथ बाजपेयी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त.
 


(प्रो. ए. डी. एन. बाजपेयी)

                                              रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर में पदस्थ अर्थशात्र के प्रोफ़ेसर अरुण दिवाकर नाथ बाजपेयी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में शीघ्र ही पदभार ग्रहण करेंगे. हिमाचल प्रदेश के एक मात्र विश्वविद्यालय के कुलपति का राज्यपाल द्वारा हस्ताक्षरित नियुक्ति आदेश उन तक पहुँच चुका है. ज्ञातव्य है कि
प्रो. ए. डी. एन. बाजपेयी एक समय अवधेश प्रताप सिंह रीवा विश्वविद्यालय सहित चित्रकूट विश्वविद्यालय का दोहरा कार्यभार सम्हाल चुके हैं. ओजस्वी व्यक्तित्व एवं विशिष्ट कार्यशैली के कारण वे सदैव भीड़ से हटकर दिखाई दिए हैं. अर्थशास्त्र जैसे जटिल विषय के महारथी होने के साथ ही प्रो. बाजपेयी एक अच्छे साहित्यकार और कवि भी हैं. मुझे ख़ुशी है कि मुझे उनका सानिध्य प्राप्त हुआ है.  उनके सुरीले कंठ और भावाभिव्यक्ति का मैं कायल हूँ. संस्कारधानी जबलपुर ऐसे व्यक्तित्व को चिरस्मृतियों में रखेगा.  हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय  के कुलपति बनने पर उन्हें हिंदी साहित्य संगम जबलपुर की अशेष
शुभ भावनाएँ.

                   कुछ दिन पूर्व मेरे द्वारा रिकार्ड की गयी प्रो. अरुण दिवाकर नाथ बाजपेयी की एक कविता आप सभी के समक्ष प्रस्तुत है:-


रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के पूर्व कुलपति प्रो. आशुतोष श्रीवास्तव का निधन
 
(प्रो. आशुतोष श्रीवास्तव)
              रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के पूर्व कुलपति प्रो. आशुतोष श्रीवास्तव कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे. दिनांक २१ मई ११ को उनके निधन से संस्कारधानी  जबलपुर का शिक्षा, साहित्य एवं उर्दु जगत स्तब्ध रह गया. प्रो. श्रीवास्तव जबलपुर के पूर्व महापौर एवं वरिष्ठ साहित्यकार स्वर्गीय श्री पन्नालाल श्रीवास्तव "नूर" के सुपुत्र थे. यह क्रूर नियति का कहर ही कहलायेगा कि उनके अनुज श्री विश्वतोश श्रीवास्तव (ओम जी ) का पिछले रविवार दिनांक १५ मई २०११ को अचानक हुए हृदयाघात से निधन हुआ है.
               प्रो. श्रीवास्तव रा. दु. वि. वि. जबलपुर के रसायनशास्त्र विभागाध्यक्ष थे. कुछ समय पूर्व उन्हें रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलपति का प्रभार सौंपा जाना उनकी अपनी विलक्षण प्रतिभा का ही परिचायक था.  

( विजय तिवारी "किसलय" एवं प्रो. आशुतोष श्रीवास्तव)
                                   प्रो. श्रीवास्तव को फारसी, और उर्दु साहित्य का गहन ज्ञान होने के साथ-साथ हिंदी और अंग्रेजी पर भी बराबर नियंत्रण था. इनकी अद्भुत प्रतिभा को साहित्य और शिक्षा जगत सदैव याद रखेगा.



       मैं स्वयं उनकी अभिवक्ति, लहजे और शब्द सामर्थ्य का हमेशा प्रशंसक रहा हूँ. मैं जानता हूँ कि जबलपुर वासी अपने अजीज "आशुतोष" की कमी एक लम्बे अरसे तक महसूस करेंगे. हिंदी साहित्य संगम जबलपुर की उन्हें विनम्र  श्रद्धांजली.


प्रस्तुति-
















डॉ. विजय तिवारी "किसलय"