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शुक्रवार, 16 मई 2014

९ मई २०१४ को रेडियो मधुबन, माउंट आबू द्वारा विजय तिवारी "किसलय" से लिया गया इंटरव्यू

  ९ मई २०१४ को रेडियो मधुबन, माउंट आबू  द्वारा विजय तिवारी "किसलय" से  लिया गया साहित्यिक इंटरव्यू आप भी सुनें-
https://archive.org/details/Dr.VijayTiwariH.G.Helkar.


प्रस्तुति:
 -विजय तिवारी "किसलय"

शनिवार, 8 मार्च 2014

गुलाब गेंग का प्रोमोशनल साँग जबलपुर की चैताली ने गाया

       जबलपुर में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, इसका एक और उदाहरण जबलपुर की चैताली श्रीवास्तव हैं, जिन्होंने अभी  रिलीज हुई फिल्म गुलाब गेंग का प्रोमोशनल गाना  'मौज की मल्हारें' गाया है. संगीतज्ञ राजेश रोशन के सहायक और उस्ताद राहत फ़तेह अली खान के बिजनेस मेनेजर रहे चित्रेश श्रीवास्तव की बेटी चैताली ने इस गाने के  हिंदी भाग को साधु सुशील तिवारी के साथ गाया है वहीं अंग्रेजी भाग को कनाडा की सुपर वूमेन लिली ने स्वर दिया है.


         श्री पी. ए. दीपक और जॉन स्टेवार्ट की प्रशंसा करते हुए चैताली ने बताया  कि इन्होंने मेरी प्रतिभा को देख कर ही  रा-वन के निर्देशक अनुभव सिन्हा को इस गाने के लिए मेरा नाम सुझाया और मुझे खुशी है कि मैं उनकी अपेक्षाओं पर खरी उतरी. कुछ समय पूर्व चैताली का एक अंग्रेजी गाना  'आई विल नेव्हर लेट यू गो' अंतरराष्ट्रीय कलाकार एकॉन ने अपनी वेब साईट पर रिलीज किया है . इण्डियन क्लासिकल तथा वेस्टर्न सांग्स में पारंगत होने के साथ साथ ट्रिनिटी कॉलेज लन्दन द्वारा प्रामाणिक गायिका चैताली अभी तक अनेक लाईव शो और इला अरुण के साथ म्यूजिक प्ले कर चुकी हैं.  आशा भोसले एवं इंग्लिश सिंगर बेयोंसे को अपना आदर्श मानने वाली चैताली बालीवुड में गायिका के रूप अपना स्थान बनाने प्रयासरत हैं. लगन, निष्ठा और इनकी प्रतिभा को देखते हुए संस्कारधानी को इनसे बहुत अपेक्षाएँ हैं.

प्रस्तुति- 












डॉ. विजय तिवारी 'किसलय' 

सोमवार, 7 नवंबर 2011

बेटी बचाओ अभियान के चलते ५८७ पृष्ठीय काव्य रचना "बेटे से बेटी भली" के रचयिता श्री मोहन शशि जी से भेंट वार्ता


          ०१ अप्रेल १९३७ को जन्मे आदरणीय श्री मोहन शशि जी संस्कारधानी जबलपुर के वरिष्ठ पत्रकार एवं अग्रणी साहित्यकार हैं. अपनी स्थापना की स्वर्णिम वर्षगाँठ मना चुकी सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था "मिलन" के सूत्रधार (मिलन के प्राण कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी ) की प्रकाशित कृतियाँ:- सरोज-१९५६, तलाश एक दाहिने हाथ की- १९८३, राखी नहीं आई- १९८५, हत्यारी रात, शक्ति साधना-१९९२,  दुर्गा महिमा- १९९५, अमिय-१९९७-९८ हैं एवं १० नवम्बर २०११ को बेटे से बेटी भली 
५८७ पृष्ठ लम्बी छंद मुक्त कविता (गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड में पंजीबद्ध होने योग्य) की पुस्तक का विमोचन होने जा रहा है. विमोचन अवसर पर राष्ट्र स्तरीय नेताओं, अधिकारियों, कलाकारों एवं साहित्यकारों की उपस्थिति चिरस्मरणीय रहेगी.
      बचपन से ही निर्भीक , स्वाभिमानी एवं जिज्ञासु प्रवृत्ति के शशि जी को जब राजनीति से ज्यादा साहित्य एवं पत्रकारिता ने प्रभावित किया तो उनकी लेखनी ने आज तक विराम नहीं किया. देश - विदेश की यात्राओं, आँखों देखा जगत एवं अपने अनुभवों का निचोड़ सदैव इनकी रचनाओं एवं पत्रकारिता के माध्यम से समाज के सामने आता रहा है.





         पारिवारिक तथा सामाजिक परेशानियों एवं हृदयाघातों के चलते जीवन पथ पर अविराम- अपराजेय की भूमिका में ही सदैव आपके दर्शन हुए.  ज्यों - ज्यों परेशानियों ने मार्ग अवरुद्ध करना चाहा, आपका हौसला कम होने की बजाय और बढ़ता गया. ७५ साल की उम्र में भी रोजाना दैनिक भास्कर के दफ्तर जाना और आना. अवकाशों एवं रात्रि के एकांत में एक ऐसे जूनून ने जन्म लिया जो ५८७ पृष्ठ की छंद मुक्त कविता लिखने के बाद शांत हुआ सा प्रतीत होता है, मगर श्री शशि जी के अनुसार वो इस कविता को और आगे  जारी रखना चाहते हैं. बातों ही बातों में उन्होंने  बताया कि 
मुझे इसकी प्रेरणा कोई अज्ञात  शक्ति ने दी है  और  मैं  इसे  आगे  भी लिखने का इच्छुक हूँ.
                इस  ५८७ पृष्ठीय काव्य रचना "बेटे से बेटी भली" के रचयिता श्री मोहन शशि जी से विमोचन पूर्व  आज दिनांक ६ नवम्बर २०११ को इस कृति से  सम्बंधित भेंट वार्ता की तो  कुछ अनछुए  पहलू भी सामने आये और  हमने देखा  कि उनकी ओजस्विता  में भी  कमी नहीं  दिखाई दी.
आईये  हम  उनसे ली गयी भेंट  वार्ता दिखाते हैं
कृपया वीडियो  प्ले आइकान  पर  क्लिक करें  और  वार्ता का आनंद लें:-


प्रस्तुति:-













-विजय तिवारी "किसलय"




सोमवार, 31 अक्टूबर 2011

सीनियर आर्टिस्ट श्री सुरेन्द्र राजन के जबलपुर प्रवास पर उनसे भेंट वार्ता.

                               श्री सुरेन्द्र राजन आज फ़िल्मी दुनिया के लिए अन्जाना नाम नहीं है. आज भले ही वे फ़िल्मी सफ़र पर निकल पड़े हों लेकिन सबसे पहले वे अपने आप को एक सच्चा कलाकार मानते हैं, प्रारम्भ में आपकी रुचि पेंटिंग्स एवं फोटोग्राफी में रही.  उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिले पुरस्कार एवं सम्मान उनकी कला के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं अनेक फिल्मों, टी वी फिल्मों, डाक्यूमेंटरी फिल्मों में विगत १५-२० वर्षों से लगातार आपने अपनी विशिष्ट भूमिकाओं से दर्शकों को प्रभावित किया है. गांधीजी की ही चार भूमिकाएँ निभा चुके श्री राजन मर्डर-टू, माई फ्रेंड पिंटो, एक्लिप्स ऑफ़ तरंगा, फस गए रे ओबामा, फ्रुट एंड नट, ई एम आई : लिया है तो चुकाना पड़ेगा, फिर कभी, खोया खोया चाँद , धमाल, द लास्ट डे ऑफ़ राज, द केबिन मेन, पहेली, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, मुन्ना भाई एम बी बी एस , लीजेंड ऑफ़ भगत सिंह, वीर सावरकर, तक्षक, इलेक्ट्रिक मून आदि फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं. साठोत्तरी होने के बावजूद, लाठी हाथ में रखने के बावजूद उनका दिल जवान है, आवाज में रौब है और आगे बहुत कुछ करने का जज्बा है. 
(श्री सुरेश श्रीवास्तव, श्री सुरेन्द्र राजन एवं विजय तिवारी 'किसलय')

                                 अपनी व्यस्तता के चलते आज जब वे जबलपुर पधारे तो उनके चेहरे पर तनिक भी थकान नजर नहीं आ रही थी. रानी दुर्गावती संग्राहालय की कला वीथिका में आभा भारती के छाया चित्रों की प्रदर्शनी में सिरकत करने आये श्री एस. राजन सभी से बड़ी सहजता से मिल रहे थे. सेलिब्रिटी होते हुए भी उन्होंने स्वयं को सहजता से दूर नहीं रखा. शायद यही एक महान कलाकार की विशेषता है. वार्ता के दौरान आज उन्होंने बताया कि मैं जल्दी ही कुछ दिनों के लिए जबलपुर  आने वाला हूँ इससे पता चलता है कि उनके मन में जबलपुर और जबलपुर के मित्रों के प्रति कितना लगाव है. जब उनसे पूछा कि आप आप जबलपुर में क्या करना चाहते हैं तो उन्होंने बड़े सहज भाव से कहा कि मैं सबके बीच बैठ कर सबके विचार जानना चाहता हूँ. अपने विचार व्यक्त करना चाहता हूँ. हम जीवन के अनुभवों को परस्पर बाँटना चाहते हैं. एक दूसरे की बातों से कुछ लेना-देना भी चाहते हैं. इस अवसर पर उनके मित्र वरिष्ठ आर्टिस्ट श्री सुरेश श्रीवास्तव, प्रोफ़ेसर ज्ञानरंजन, बसंत सोनी, कामता सागर, विनय अम्बर, मुकुल यादव, बसंत मिश्र, डॉ. अजय गुप्ता, शक्ति प्रजापति,  सिद्धार्थ खरे, राजेंद्र दानी, मनोहर बिल्लोरे,  पंकज स्वामी आदि उपस्थित रहे.



                         आईये, इस अवसर पर मेरे द्वारा रिकार्ड की गयी श्री सुरेन्द्र राजन की भेंट वार्ता आपको दिखलाते हैं. भेंट वार्ता में शामिल हैं श्री सुरेश श्रीवास्तव, श्री कामता सागर, अजय गुप्ता के साथ मैं.... और सीधे प्रश्न कर्ता हैं हमारे शक्ति प्रजापति:-

प्रस्तुति:-

-विजय तिवारी 'किसलय'






बुधवार, 28 सितंबर 2011

संस्कारधानी जबलपुर मध्य प्रदेश के ख्यातिलब्ध युवा चित्रकार एवं मूर्तिकार श्री शक्ति प्रजापति आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं.

संस्कारधानी जबलपुर मध्य प्रदेश के ख्यातिलब्ध युवा चित्रकार एवं मूर्तिकार श्री शक्ति प्रजापति आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. ये महाकौशल सहित पूरे मध्य प्रदेश में अपनी विशिष्ट शैली के लिए विख्यात मूर्तिकार स्वर्गीय श्री कुंदन प्रजापति के उत्तराधिकारी सुपुत्र हैं. पिता जी की विरासत को नए आयाम तक पहुँचाने में काबिल श्री शक्ति जी लगातार साधना में जुटे रहते हैं. श्री शक्ति प्रजापति द्वारा निर्मित प्रतिमाएँ विशिष्ट रंगों, अनुपात, आकार में सामंजस्य बिठाए तो होती ही हैं वहीं इनकी शैली भी अन्य कलाकारों से अनूठी है.
जीवन्तता और माधुर्य का मिलन जब मूर्तिकला में हो तो कला खुद कलाकार की महत्ता बताती है और मैं कह सकता हूँ कि श्री शक्ति भी इन्हीं अग्रगण्य कलाकारों की श्रेणी में आते है. आईये हम आपको श्री शक्ति प्रजापति से, उनकी कला से, उनकी कार्यशाला से और उनके विचारों से रू-ब-रू होते हैं.








- विजय तिवारी "किसलय"


जबलपुर.


मंगलवार, 27 सितंबर 2011

लोकगन्धर्व पं रूद्र दत्त दुबे द्वारा रचित लोकराग "राजीवसुरा" की समीक्षा गोष्ठी संपन्न.

लोकगन्धर्व पं रूद्र दत्त दुबे द्वारा रचित लोकराग "राजीवसुरा"  की समीक्षा गोष्ठी की रपट  एवं चित्र निम्नानुसार  हैं :-



प्रस्तुति-
-विजय तिवारी 'किसलय'