गुरुवार, 26 अगस्त 2010

दोहा श्रृंखला (दोहा क्रमांक- ८९)

अपने ही
जब तोड़ते,
अपनों का
विश्वास.

दुनिया में
तब गैर से ,
कौन करेगा
आस ...

-विजय तिवारी
  " किसलय "

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