बुधवार, 18 अगस्त 2010

२२ अगस्त १० को स्व. हरिशंकर परसाई की स्मृति में " परसाई प्रसंग".

                          रंग मंडल की राष्ट्रीय ख्यातिलब्ध संस्था ' विवेचना जबलपुर '  किसी परिचय की मोहताज़ नहीं है.  अपने नाटकों के सफल मंचन  एवं प्रतिवर्ष जबलपुर  में नाट्य समारोहों के आयोजन से संस्था ने  जन- जन में अपना स्थान बना लिया है.

              व्यंग्य विधा के जनक महान व्यंग्य शिल्पी  स्व. हरिशंकर परसाई का जन्म दिवस अर्थात  २२ अगस्त को जबलपुर का साहित्य जगत अपनी धरा के अद्भुत व्यक्तित्व के सम्मान  में अनेक कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें स्मृत और नमन करता है.
                       विवेचना ने २२ को अपने कार्यक्रम " परसाई प्रसंग " में डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी जी को आमंत्रित किया है,  जो  ' परसाई के बाद व्यंग्य '  विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे.
                श्रोतागण  इस अवसर पर डॉ. चतुर्वेदी के  रचना पाठ का आनंद भी प्राप्त कर सकेंगे.
             परसाई जी के जन्म दिवस की सार्थकता तभी होगी   जब हम उनके साहित्य से लाभान्वित हों....  
          इसी लिए विवेचना परसाई जी की रचना का नाट्य मंचन भी करेगी.
जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती संग्रहालय, भंवरताल में २२ अगस्त २०१० की संध्या ७.०० विवेचना के हिमांशु राय, बांके बिहारी ब्योहार, वसंत काशीकर एवं विवेचना परिवार ने साहित्यप्रेमियों से उपस्थिति का निवेदन किया है.
प्रस्तुति:-









- विजय तिवारी " किसलय "

1 टिप्पणी:

  1. आना तो संभव नहीं..किन्तु रिपोर्ट का इन्तजार रहेगा.

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