गुरुवार, 8 अप्रैल 2010

दोहा श्रृंखला (दोहा क्रमांक ८३)

लडकी  घर से दूर है,
लड़का बसा विदेश .
ममता सिसके गाँव में.
बदला यूँ परिवेश ..

- विजय तिवारी "किसलय "

11 टिप्‍पणियां:

  1. घर में एक यंत्र ले आओ
    कंपूटर जी कह कर उसे बुलाओ
    अंतर जाल उस पर लगवाओ
    एक केमरा उस पर बिठ्वाओ
    फिर आंखो में आंखे डाळ डाल कर
    ढेरो ममता रिश्तो पर लुटवाओ !!

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  2. Vartmaan ki yahi sabse badi vidambna hai Sir... Lekin Jab Hal Nikle tab na!!



    "RAM"

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  3. अब तो घर घर की कहानी है यह...बेहतरीन दोहा!

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  4. आज के हालात का बडा सटीक शब्दों मे वर्णन किया है।

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  5. बहुत सुन्दर!
    इसको चर्चा में भी ले लिया है!
    http://charchamanch.blogspot.com/2010/04/blog-post_09.html

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  6. बहुत ही मर्मस्पशी ढंग से हकीक़त को बयां किये हैं !

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  7. SAMAY KI VIDAMBNAYEN NIRALI HAIN.
    DHUP-CHANV HI ISKI NISHANI HAIN.

    KISLAY JI,BAHUT SHANDAR,AUR INTEZAR HAI.........................................

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  8. बहुत बढ़िया लगा! लाजवाब! उम्दा प्रस्तुती!

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