मंगलवार, 26 जनवरी 2010

दोहा श्रृंखला (दोहा क्रमांक ८१)

नियम तोड़ना जब बनी,
आज हमारी शान।

क्या? कहलाता है यही,
संविधान का मान॥

- विजय तिवारी " किसलय "

11 टिप्‍पणियां:

  1. सार्थक दोहा विजय जी ! बहुत अच्छा.

    उत्तर देंहटाएं
  2. गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
    नया वर्ष स्वागत करता है , पहन नया परिधान ।
    सारे जग से न्यारा अपना , है गणतंत्र महान ॥

    उत्तर देंहटाएं
  3. नियम तोड़ना जब बनी, आज हमारी शान।
    क्या? कहलाता है यही,संविधान का मान!!
    संविधान का मान कि इसको मन का ढालो
    सुविधा का अनुरुप, सभी धारा अजमा लो.
    कहते हैं कविराय, गजब ही सिद्ध किया है मंत्र
    सब मिल का चिल्लाओ, जय भारत गणतंत्र.


    -गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ. -

    उत्तर देंहटाएं
  4. गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. bahut sateek baat
    ham har niyam tod rahe hain to
    samvidhaan ka samaan kaha hua

    Gantantra diwas ki hardik shubhkamanaa

    उत्तर देंहटाएं
  6. " behad sacchai bhari baaat kum alfaz me "

    ---- eksacchai { AAWAZ }

    उत्तर देंहटाएं
  7. हां कडवा सच है ये.
    गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें.

    उत्तर देंहटाएं
  8. Galat samay pe niyam todna shaan ban rahee hai!
    Gantantr diwas ajramar rahe!

    उत्तर देंहटाएं
  9. आपके दोहा को तो उड़्न तश्तरी ने कुण्डली बना दिया

    उत्तर देंहटाएं
  10. सुन्दर दोहे आपको जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं