शुक्रवार, 1 जनवरी 2010

फिर आया नव वर्ष

पिछले वर्षों के सभी, मुद्दे और विकल्प


पूरा करने के लिए, लेंगे फिर संकल्प


स्वयं और परिजनों का, करने को उत्कर्ष


--------------------- फिर आया नव वर्ष




लिप्त रहे निजस्वार्थ में, किया न कोई विकास


परहित की बातें सभी, लगती थीं बकवास


विवश किया पदमोह ने, करने जन संघर्ष


--------------------- फिर आया नव वर्ष




जननायक कुछ आज के, बनकर भ्रष्ट-दलाल


सौदे का मुर्गा समझ, करते हमें हलाल


बेशर्मी को ओढ़कर, प्रकट करें ये हर्ष


---------------- फिर आया नव वर्ष




झूठ, द्वेष , पाखण्ड से, ग्रसित हुआ जनतंत्र


भूल गए ये आज सब, देश-प्रगति का मन्त्र


राजनीति के क्षरण का , बतलाने निष्कर्ष


--------------------- फिर आया नव वर्ष




बने प्रगति सोपान अब, छल, बल, दल, षड्यंत्र


शेष कमी पूरी करे, विकृत मीडिया तंत्र


अपनापन दिखलायेंगे, मिलकर ये दुर्धर्ष


-------------------- फिर आया नव वर्ष




"सोन-चिरैया" नाम से, था प्रसिद्ध जो देश


दूध - सरित अब न बहें, हैं कंगाल नरेश


नैतिकता का हो रहा, लगातार अपकर्ष


----------------- फिर आया नव वर्ष




औद्योगिक उत्थान पर, लगातार कर शोध


निर्भरता हम पायेंगे, हटा सभी अवरोध


ज्ञापित करने विश्व को, जग-सिरमौर सहर्ष


------------------------ फिर आया नव वर्ष




तकनीकी, विज्ञान से, हों नवीनतम खोज


श्रम, बल, बुद्धि, विवेक से, प्रगति करें हम रोज


बतलाने संसार को, वैभव और प्रकर्ष


--------------- फिर आया नव वर्ष




-डॉ विजय तिवारी " किसलय "

(नव वर्ष पर इस रचना का पुनर्प्रकाशन किया गया है )

7 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी ये रचना बहुत अच्‍छी लगी .. आपके और आपके परिवार के लिए भी नववर्ष मंगलमय हो !!

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  2. नये वर्ष की शुभकामनाओं सहित
    आपसे अपेक्षा है कि आप हिन्दी के प्रति अपना मोह नहीं त्यागेंगे और ब्लाग संसार में नित सार्थक लेखन के प्रति सचेत रहेंगे।
    अपने ब्लाग लेखन को विस्तार देने के साथ-साथ नये लोगों को भी ब्लाग लेखन के प्रति जागरूक कर हिन्दी सेवा में अपना योगदान दें।
    आपका लेखन हम सभी को और सार्थकता प्रदान करे, इसी आशा के साथ
    डा0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
    जय-जय बुन्देलखण्ड

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  3. नया साल...नया जोश...नई सोच...नई उमंग...नए सपने...आइये इसी सदभावना से नए साल का स्वागत करें !!! नव वर्ष-2010 की ढेरों मुबारकवाद !!!

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  4. विजय भाई,
    उम्दा प्रस्तुति ... आभार . नववर्ष की हार्दिक शुभकामना ..
    महेन्द्र मिश्र.

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  5. HAPPPY NEW YEAR,SIR,I WANT TO KNOW MANY THINGS FROM U AS I WANT TO MAKE A CARRIER IN GENERALISM.
    ANOTHER THING I THINK SIR,TITLE "PHIR" KI JAGAH "EK AUR NAYA VARSH "HONA CHAHIYE THA,KYUNKI SHAYAD PHIR KA TATPARYA DOBARA YA BAR BAR HONE VALI KRIYA SE HAI YE SACH HAI KE NAV VARSH HAR VARSH ATEIN HAIN,PAR HAR NAYA VARSH APNE AAP MAIN EK AKELA HOTA HAI,JO PHIR KABHI NAHIN ATA,HAAN USKI JAGAH JARROR EK AUR NAYA VARSH AA JATA HAI.KYUNKI KISI BHI VARSH KI JAGAH DOOSRA VARSH RECORD MAIN NAHIN LE SAKTA AT:MERE VICHAR SE PHIR NAYA VARSH NAHI HO SAKTA,HAAN EK AUR NAYA VARSH AVSHYA HO SAKTA HAI.KRIPA KAR GURUVAR MERE SANDEH KA NIVARAN KARNE KA KASTH KAREIN APKI BADI KRIPA HOGI.

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