गुरुवार, 31 दिसंबर 2009

जबलपुर का सपूत, कादंबिनी का यशस्वी दूत अब नहीं रहा.


मध्य प्रदेश की साहित्यिक नगरी जबलपुर , जहाँ हिन्दी के अनेक गण्यमान लेखक कवि और चिंतक पैदा हुए । अपनी कर्म भूमि बनाई । विश्व में जबलपुर की कीर्ति पताका फहराई, उनमें 'खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी ' कविता की रचयिता सुभद्रा कुमारी चौहान,व्यंग्य विधा के जनक हरिशंकर परसाई, रामेश्वर शुक्ल अंचल, महर्षि महेश योगी, आचार्य रजनीश ओशो, सेठ गोविनदास, भवानी प्रसाद तिवारी के बाद भी लंबी शृंखला है जिसे लिखना स्वयं जबलपुर की बड़ाई करना कहा जाएगा। मैं तो ये सूचित करना चाह रहा था कि इसी माटी में पैदा होकर पल- बढ़ कर पत्रकार और लेखक के रूप में जबलपुर को अनूठी पहचान दिलाने वाले, कादंबिनी के यशस्वी संपादक श्री राजेन्द्र अवस्थी जी कल दिनांक 30 दिसंबर 2009 को लंबी बीमारी के बाद हमसे बहुत दूर चले गये, जिसे हिन्दी जगत एक लंबे कालखंड तक स्मरण रखेगा। नवभारत दैनिक से अपने पत्रकारीय जीवन की शुरुआत करने वाले राजेन्द्र अवस्थी का जन्म 25 जनवरी 1930 को हुआ था . प्रारंभ से ही प्रतिभाशाली और महत्वाकांक्षी होने के कारण सदैव कुछ नयी सोच उनके जेहन में उठा करती थी जिसे वे कार्यरूप में परणित करने उतावले रहते थे, शायद अपनी अभिव्यक्ति और अपनी भावनाओं को मूर्तरूप देने का साधन उन्हें पत्रकारिता के अलावा और कोई दूसरा अच्छा नहीं लगा. और चल पड़े इसी राह पर. कादंबिनी में रहते हुए उन्होने अनेक देशों की यात्राएँ की. यात्रा विवरणों से पाठकों को अवगत कराया. पर्यटन स्थलों की जानकारी हो या फिर साहित्यिक पुरोधाओं की बात, कादंबिनी में इन्हें बहुत स्थान दिया गया , आपके संपादकीय जीवन में कादंबिनी के तन्त्र- मंत्र विशेष अंकों को जितनी लोकप्रियता मिली उससे कहीं अधिक उनके " काल चिंतन " को सराहा गया. जबलपुर में उनका आना यदा कदा ही होता था, मैं सौभाग्यशाली हूँ कि मुझे उनका सानिध्य प्राप्त हुआ है, मैने उन्हें जितनी बार देखा मुझे वे सदैव मुस्कराते हुए ही दिखे, उनका हँसमुख चेहरा और उनकी विनोद मयी बातें आज भी बरबस याद आती हैं. जबलपुर के अनेक लेखकों से उनके स्नेहिल संबंध थे. बुन्देली लेखिका श्रीमती सुधा रानी श्रीवास्तव को उनका " भौजी " कह कर पुकारना और नोकझोंक करना आज भी याद है. जबलपुर के एक- दो साहित्यिक कार्यक्रमों में मैने उन्हें देखा है, और उनकी अभिव्यक्ति भी सुनी है. आज जब उनके निधन का समाचार ज्ञात हुआ तो ऐसा लगा कि जबलपुर का एक अहम पत्रकारीय और साहित्यिक स्तंभ नहीं रहा. हमारी हार्दिक संवेदनाएँ और श्रद्धांजलि जबलपुर की माटी के सपूत को.

- विजय तिवारी " किसलय "



6 टिप्‍पणियां:

  1. जबलपुर संस्कारधानी के साहित्य गौरव आदरणीय राजेन्द्र अवस्थी जी के निधन से सभी दुखी है . उनके निधन से संस्कारधानी के साहित्य साहित्य समाज को अपूरणीय क्षति हुई है . दिवंगत आत्मा को विन्रम श्रध्धांजलि अर्पित करता हूँ .

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  2. आपने साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर को याद किया। आभार डॉ. साहब। हम भी उन्हें विनम्र श्रद्धांजली अर्पित करते हैं।

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  3. दिवंगत आत्मा को विन्रम श्रद्धांजलि ।

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