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डॉ. विजय तिवारी " किसलय " कवि, कहानीकार, पत्रकार, सम्पादक, समीक्षक. .
काव्य संग्रह :- किसलय के काव्य सुमन आकाशवाणी, टी. वी. चेनल्स एवं पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन. सम्प्रति :- मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमि. , शक्ति भवन, जबलपुर में कार्यरत. समाज, साहित्य एवं संस्कृति को समर्पित, हिन्दी भाषा पर कार्य एवं विशेष लगाव.
तुझे भुलाना चाहती हूँ मैं , लेकिन ……..
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तुझे भुलाना चाहती हूँ मैं , लेकिन ……..
कैसे भुला दूं मैं
मेरी सासों का चलना
क्यों की इनमें भी तो
तुम ही बसे हों हर पल
त...
समझौता गमों से ... कर ही लेना चाहिए
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ब्लाग जगत में डेढ महीने से चल रही अनियमितता शायद अब समाप्त हो जाए , पूरे
जून और आधे जुलाई भर में मात्र पांच पोस्ट लिख पायी , वो भी नाम के लिए ही।
बहुत...
आज महफ़िल में कोई
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कभी कभी ये जो आप सबका प्रिय ‘बवाल’ है ना, इसे हमें ‘रय दुष्ट’ कहने का मन
किया करता है. पता है क्यों ?
इसका मूडे-मंज़र अजीब ही होता है. ये शायर-वायर टाइप के ...
२ जुलाई की वो मोहक शाम..
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२ जुलाई की मोहक शाम, मैं, मेरा कम्प्यूटर और सामने एग्रीगेटर धाम!!
एकाएक ब्लॉगवाणी से गुजरते ’कनाडा से’ शीर्षक पर नजर गई. स्वाभाविक था क्लिक
करना. पता चला अ...
दिल की खोज
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उदास है दिल
न जाने क्यूँ
किसे खोजता है
किसकी तलाश है
शायद ये भी अब
किसी गहरे
सागर में डूब
जाना चाहता है
शायद ये भी
सागर की तलहटी में
छुपे किसी अनमोल
मोती की ...
चलो इक ताज महल बोएँ
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मेरे फ़ितूरों की फ़ेहरिस्त का सबसे अज़ीज़ फ़ितूर… चलो इक ताजमहल बोएँ ……जिसे काफ़ी
अरसा पहले पोस्ट किया था… समय बहुत गुज़र गया तब से अब तक…आज पन्ने पलटे तो लगा
, ...
अमृत रस
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ताल तलैये सूख चले थे,
कली कली कुम्भ्लाई थी ।
धरती माँ के सीने में भी
एक दरार सी छाई थी।
बेबस किसान ताक़ रहा था,
चातक भांति निगाहों से,
घट का पट खोल जलबिंदु
...
राजस्थानी लोकनृत्य और 'बवादी मॉल '
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पिछले महीने ही एक नया मॉल हमारे शहर 'अलैन 'में खुला,पहले यहाँ बड़े शौपिंग
मॉल दो ही थे -एक अलैन मॉल ,दूसरा अल जिमी मॉल.
यह अब तक का सब से बड़ा मॉल है जहाँ ४...
झटका!
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बात उन दिनों की है जब मैं कक्षा 4 और मेरा भाई कक्षा 2 के विद्यार्थी थे.
दादी-बाबा के अत्यधिक स्नेह के कारण हम लोगों को घर के भीतर ही खेलने की अनुमति
थी. म...
आखरी सफ़र
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**बेटे से माँ की दशा देखी न गयी *
*सामने ही उसके, रंगों की दुर्दशा हो गयी *
*कैसे गले से मंगलसूत्र छीना गया *
*हाथों से देखो चूड़ियाँ कैसे तोड़ी गईं *
*हँस...
देश वासियो ! अब देशप्रेम करो, दिखाओ मत .....
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आज जब देश के अन्दर और बाहर आतंक को बढावा देने वाले तत्व सक्रिय हैं. हमारे
देश के अन्दर ही आतंकी गतिविधियाँ आए दिन बढ़ रहीं हैं. हम जानते भी हैं कि ये
विदेशि...
6 टिप्पणियाँ:
बढिया दोहा प्रेषित किया है।
परम जीत बाली जी
नमस्कार
आप मेरे ब्लॉग तक आए आपने दोहा पढा
आपको अच्छा लगा ,
मुझे खुशी हुई
आभार
आपका
विजय
shukriya .
bahut achchha likha hai .
आदरणीया रेणुजी
नमस्कार
प्राथमतः आपके एस ब्लॉग
में आने के लिए आभार
उम्मीद है हमारी साहित्यिक
समीपता बरकरार रहेगी
आपका
विजय
बढ़िया रचना के लिये बधाई स्वीकारें मेरे भाई
योगेन्द्र मौदगिल
नमस्कार
आपके द्बारा मेरे ब्लॉग पर
आकर दोहा पढ़ना और उस
पर अपना अभिमत देना ,
बहुत अच्छा लगा
हम आपके आभारी हैं
आपका
विजय तिवारी " किसलय "
जबलपुर
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