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शुक्रवार, 21 सितंबर 2018

भालचन्द्र स्तोत्र

भालचन्द्र स्तोत्र


लंबोदर, गजमुख, सुमुख,
धूमकेतु, विघ्नेश।
विकट, विनायक, गजकरण,
दंती, कपिल, गणेश।।

- विजय तिवारी "किसलय"
21 सितंबर 2018

सोमवार, 8 अप्रैल 2013

दोहा श्रृंखला (दोहा क्रमांक-९३)

जीवन-घट   दुख   से   भरा,  खुशियाँ   बूँदें   चार। 
"किसलय" जितना बन पड़े, बाँट सभी को प्यार।।











- विजय तिवारी "किसलय" 

शुक्रवार, 14 जनवरी 2011

दोहा शृंखला (दोहा क्रमांक-९२)

द्रवित
दृगों की
देहली,
र्देदिल
दुश्वार.
दुखदायी ये
दूरियाँ,
स्तक
देतीं
द्वार..












- विजय तिवारी 'किसलय'

सोमवार, 18 अक्टूबर 2010

दोहा शृंखला (दोहा क्रमांक-९१)

त्रिगुण ज्ञान-धन-शक्ति के,
नवदुर्गायी त्रिखंड।
"पूजा" जीवन-समर में,
देती विजय प्रचंड॥
जगत-जननी माँ दुर्गा की पूजा उपासना के लिए नव रात्रि से अच्छा शुभ मुहूर्त अन्य कोई नहीं होता। नौ रात्रियों की प्रथम तीन रात्रियों में माँ की आराधना से भक्तों में ज्ञानवृद्धि एवं अज्ञानता का नाश होता है। अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए ये दिन विशेष फलदायी होते हैं। चतुर्थी, पंचमी एवं षष्ठी में किया गया पूजन-अर्चन भक्तजनों की आर्थिक परेशानियों का शमन करके सम्पन्नता लाता है। तत्पश्चात सप्तमी, अष्टमी एवं नवमी की साधना-भक्ति शक्तिदायिनी मानी गयी है। इसके अतिरिक्त माँ शक्ति-सामर्थ्य तथा विजय भाव को भी प्रखर बनाती है। यश-कीर्ति फैलाते हुये मृत्युलोक से मुक्ति दिलाती है।
तात्पर्य यह कि जीवन संग्राम में विजय के लिए आवश्यक तीन गुण 'ज्ञान, धन और शक्ति ' नवरात्रि के त्रिखंडों में की गई साधना-आराधना से निःसंदेह प्राप्त होते हैं।

- विजय तिवारी " किसलय "

मंगलवार, 31 अगस्त 2010

दोहा श्रृंखला (दोहा क्रमांक-९०)

स्वजनों से मुख मोड़ जो,
करते सुख का भोग.
जीवन में क्या चैन से,
रह पाते वे लोग ??
---oxo---
- विजय तिवारी " किसलय "

गुरुवार, 26 अगस्त 2010

दोहा श्रृंखला (दोहा क्रमांक- ८९)

अपने ही
जब तोड़ते,
अपनों का
विश्वास.

दुनिया में
तब गैर से ,
कौन करेगा
आस ...

-विजय तिवारी
  " किसलय "

दोहा श्रृंखला (दोहा क्रमांक- ८८)


द्रवित दृगों की देहली,

दर्देदिल     दुश्वार.
दुखदायी ये दूरियाँ,
दस्तक देतीं  द्वार...








- विजय तिवारी " किसलय "

बुधवार, 25 अगस्त 2010

दोहा श्रृंखला (दोहा क्रमांक - ८७)

 झुकते पूजाघरों में,

जिनके निश्छल माथ.

लिप्त दिखे अक्सर वही,

झूठ-कपट के साथ..








- विजय तिवारी " किसलय "

मंगलवार, 13 जुलाई 2010

दोहा श्रृंखला (दोहा क्रमांक - ८६)

वर्षा जल से भरें जब
मैदानी भू-भाग .
हरियाली से लदें  तब
वन, तरुवीथी, बाग़ ..










- विजय तिवारी "किसलय"

सोमवार, 10 मई 2010

दोहा श्रृंखला (दोहा क्रमांक - ८५)

आपस में मिलकर गले,
जगा दिलों में प्यार .
सारे जग में बाँटिये,
खुशियों के उपहार ..

- विजय तिवारी " किसलय "

मंगलवार, 20 अप्रैल 2010

दोहा श्रृंखला (दोहा क्रमांक ८४)

कोई न होता जन्म से, मूरख  या गुणवान .
संस्कार   ही   ढालते,   देव,   दनुज,   इंसान ..









- विजय तिवारी " किसलय "

गुरुवार, 8 अप्रैल 2010

दोहा श्रृंखला (दोहा क्रमांक ८३)

लडकी  घर से दूर है,
लड़का बसा विदेश .
ममता सिसके गाँव में.
बदला यूँ परिवेश ..

- विजय तिवारी "किसलय "

बुधवार, 7 अप्रैल 2010

दोहा श्रृंखला (दोहा क्रमांक ८२ )

सतरंगा पुष्पित चमन,
खगवृन्दों का शोर .
झुरमुट से रवि-रश्मियाँ,
लाती स्वर्णिम भोर ..


- विजय तिवारी " किसलय "

मंगलवार, 26 जनवरी 2010

दोहा श्रृंखला (दोहा क्रमांक ८१)

नियम तोड़ना जब बनी,
आज हमारी शान।

क्या? कहलाता है यही,
संविधान का मान॥

- विजय तिवारी " किसलय "

बुधवार, 20 जनवरी 2010

दोहा श्रृंखला (दोहा क्रमांक ८०)

संघर्षों के नीर में,
बहती जीवन नाव।

पार उसी की लगे जो,
बढ़ते परख बहाव॥

- विजय तिवारी " किसलय "

सोमवार, 18 जनवरी 2010

दोहा श्रृंखला (दोहा क्रमांक ७९)

मन अशांत, छूटें स्वजन,
अंखियन बीते रैन
दौलत वह किस काम की,
जो न दे सुख चैन
- विजय तिवारी "किसलय"

सोमवार, 14 सितंबर 2009

दोहा श्रृंखला (दोहा क्रमांक ७२ से ७८ तक )

हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे:-

हिन्दी बिन्दी सी लगे, भारत माँ के भाल
केवल हिन्दी दिवस पर , सुनते हम हर साल !

हिन्दी में मिलने लगा, जग का जब सब ज्ञान
फिर क्यों सारे देश में, बढ़ी न इसकी शान ?

सच्चाई स्वीकार कर, सोचें सभी सुजान
हिन्दी के उत्थान पर, दे पाये क्या ध्यान ?

अंग्रेजी की शान में, हिन्दी का अपमान
क्यों हम सबकी आज भी, नियति बनी श्रीमान ?

मना रहे हम आज सब, हिन्दी दिवस महान
क्या ऐसा रख पायेंगे, कल भी इसका ध्यान ?

६ और अंत में देखें :-

सारे वेद पुराण हैं, जिस हिन्दी की ढाल
फिर उसके प्राचुर्य पर, नाहक उठें सवाल

-विजय तिवारी " किसलय "

शनिवार, 29 अगस्त 2009

दोहा श्रृंखला [दोहा क्र. ७० से ७२]

प्रथम पूज्य, गौरी तनय,
दयावंत, विघ्नेश।
कृपादृष्टि रखिये सदा,
सर्व गुणज्ञ गणेश ॥
***
शिवसुत, लम्बोदर, विकट,
सिद्धिसदन, गणदेव ।
विघ्नविनाशक, गजवदन,
मंगलमूर्ति त्वमेव ॥
***
बुद्धिविनायक, गुणसदन,
मंगलदायी रूप।
मेरे अंतस में बसो,
छवि ले परम अनूप ॥
***
- विजय तिवारी " किसलय "

शुक्रवार, 28 अगस्त 2009

दोहा श्रृंखला [दोहा क्र ६९ ]

गणेश पर्व के चलते
आज मैं अपनी २०० वीं पोस्ट के रूप में
भगवान भालचंद्र (गणेश जी ) का
समस्त विघ्न विनाशक ,
एकादश नाम वाला दोहा प्रस्तुत कर रहा हूँ ,
सच्चे हृदय से इसके श्रवण और पठन से
भक्तों के कार्यों में किसी भी प्रकार के
विघ्न उत्पन्न नहीं हो पायेंगे :-
*
दोहा क्रमांक - ६९
*
(भालचंद्र स्तवन )
*
गजमुख, लम्बोदर, सुमुख,
धूम्रकेतु, विघ्नेश ।

विकट, विनायक, गजकरण,
दंती, कपिल, गणेश ॥
- विजय तिवारी " किसलय "

सोमवार, 24 अगस्त 2009

दोहा श्रृंखला [दोहा क्र. ६८]

गिरिजा सुत को नमन कर,
शुरू करें शुभ कर्म ।
मिले सुनिश्चित सफलता,
उपजें नहीं अधर्म ॥
- विजय तिवारी " किसलय "