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| शशि जी, रामेश्वर नीखरा जी,ह्सरद यादव जी एवं श्रीमती ममता शर्मा जी |
जबलपुर.दिनांक १० नवम्बर २०११ को मोहन शशि की " बेटे से बेटी भली " काव्य कृति का विमोचन शहीद स्मारक प्रेक्षागृह में जनल यू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव एवं राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा श्रीमती ममता शर्मा के करकमलों द्वारा एक भव्य कार्यक्रम में किया गया। विशिष्ट अतिथियों में पूर्व सांसद श्री रामेश्वर नीखरा, श्री राजबहादुर सिंह, जगद्गुरु रामानंदाचार्य, रामनरेशाचार्य के प्रतिनिधि दया सिंधु शर्मा, राजेशपति त्रिपाठी, श्रीमती शोभा बेन पटेल, गीता शरद तिवारी, रेखा भास्कर मंचासीन रहे. ५८७ पृष्ठीय काव्य कृति के सन्दर्भ में श्री शरद यादव जी ने कहा कि जिस देश में माँ स्वतंत्र नहीं होगी वहाँ का समाज बहादुर नहीं हो सकता. पश्चिमी एवं पूर्वी यूरोप में माँ की स्वतंत्रता के कारण ही विकास संभव हो सका है. भारत में अभी तक ऐसी परिस्थितियाँ अभी तक उत्पन्न नहीं हो पाई. दहेज़ प्रथा के विरुद्ध भी समाज को आगे आने की बात कही.अतिथियों ने मोहन शशि को बधाई देते हुए कहा कि समाज में बेटियों की महत्ता सिद्ध करने में यह कृति महत्वपूर्णभूमिका का निर्वहन करेगी.प्रेक्षागृह में चन्द्रमोहनदास, जेडीए अध्यक्ष अनिल शर्मा, नगर निगम नेता प्रतिपक्ष विनय सक्सेना, कालीदास विवि के पूर्व कुलपति केके चतुर्वेदी, सहितसंस्कारधानी के गण्यमान नागरिक उपस्थित रहे। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा हस्ताक्षरित कृति को पूर्व मंत्री चन्द्रकुमार भानोत, राजपाल भाटिया एवं विख्यात ब्लोगर गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" द्वारा सम्मान निधि प्रदान कर क्रय की गयी.
शशि जी को सम्मानित किये जाने के अवसर का वीडियो देखें :-
प्रस्तुति:-
-विजय तिवारी "किसलय"
-विजय तिवारी "किसलय"

कभी कभी ज़िंदगी में ऐसे लम्हे आते हैं किसलय जी, कि उनकी स्मृतियाँ हमेशा के लिए दिल में दर्ज हो जाती हैं। ये अवसर कुछ इसी तरह का रहा आपके लिये, शशि जी के लिए और हम सबके लिए भी। सभी को बहुत बहुत बधाइयाँ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंcome here from Malaysia =)
प्रत्युत्तर देंहटाएंमूलतः यह विषय ही मूर्खतापूर्ण है.....अप क्यों बेटे व बेटी में भेद करेंगे....लेखकों व उपस्थित होने वाले सभी विग्य जनों को दूरस्थ संदेश की सामाजिक बुराइयों को समझना चाहिये न कि निकट द्र्ष्टि से तात्कालिक लाभ.....
प्रत्युत्तर देंहटाएं--योरोप आदि में मां अर्थात स्त्रियों के स्वतन्त्र होने से ही भौतिक-विकास तो हुआ परन्तु मानवीयता का ह्रास हुआ जिसके कारण ...अनाचार, मानवीय सम्बन्धों की अत्यन्त क्षति हुई एवं समाज में वैश्याव्रित्ति खुलकर फ़ैली....