रविवार, 24 अक्तूबर 2010

सुगन जाट के छाया चित्रों में प्रकृति के नजदीक रहने की ललक भी दिखाई देती है : सुगन जाट के छाया चित्रों की तीन दिवसीय प्रदर्शनी का शुभारम्भ.


(श्री अजित वर्मा एवं कामता सागर जी )
(स्व. राम मनोहर सिन्हा ) 
                   २३ अक्टूबर २०१० को अपरान्ह ३ बजे अंतरराष्ट्रीय ख्यातिलब्ध चित्रकार एवं भारतीय संविधान की मूलकृति के अलंकरणकर्ता स्वर्गीय ब्यौहार राम मनोहर सिन्हा की तृतीय पुण्यतिथि पर " प्रकृति के संवाद " के तत्वावधान में वरिष्ठ छाया पत्रकार श्री सुगन जाट के छाया चित्रों की तीन दिवसीय प्रदर्शनी का शुभारम्भ रानी दुर्गावती संग्रहालय जबलपुर स्थित कला वीथिका में हुआ. चित्रकार श्री विनय अम्बर ने सुगन जाट की कला यात्रा पर प्रकाशा डाला. भाई सुगन जाट के चित्रों में जिस सजीवता और सांकेतिक भाषा के दर्शन होते हैं वे प्रकृति और समाज की अलग कहानी कहते दिखाई देते हैं . उनके चित्रों में जहाँ मजदूरों की कथा-व्यथा स्पष्ट नज़र आती है वहीं प्रकृति के नजदीक रहने की ललक भी दिखाई देती है. अवसर, समय, समर्पण एवं    उनका नजरिया उन्हें एक दिन शिखर पर पहुँचायेगा ऐसी हमारी अशेष शुभ कामनाएँ.
 
(चित्रकार कामतासागर जी प्रदर्शनी देखते हुये ) 

 
  प्रस्तुति :
-विजय तिवारी "किसलय "

3 टिप्‍पणियां:

  1. देख कर
    जान कर
    बाँच कर

    ________अच्छा लगा

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  2. Good to read the blog post.

    Readers might be curious to know what is the organisation "Dialogue With Nature (Prakriti Se Samvaad)", why this organisation was launched, why Mr Sugan Jat was specifically shortlisted, what is the correlation between Beohar Rammanohar Sinha and Mr Jat, and why this particular exhibition was organized.

    Beohar Dr Anupam Sinha (9893383397)

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