शुक्रवार, 16 अप्रैल 2010

प्रो. जवाहर लाल चौरसिया "तरुण" ने साहित्यकार श्री ओंकार ठाकुर के ७७ वें जन्मोत्सव पर कहा- साहित्यकार के कृतित्व की चर्चा हमारा दायित्व है.

जबलपुर। विगत दिवस आंचलिक साहित्कार परिषद एवं गुंजन कला सदन द्वारा ड्रीमलेण्ड फनपार्क में साहित्यकार श्री ओंकार ठाकुर का ७७ वाँ जन्मोत्सव मनाया गया। साहित्यकार के कृतित्व की चर्चा हमारा दायित्व है । चर्चा, प्रचार-प्रसार एवं संगठनों से सम्बद्धता बगैर आज किसी भी साहित्यकार का समाज में स्थापित होना आसान नहीं है , तदाशय के विचार कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. जवाहर लाल चौरसिया "तरुण" ने व्यक्त किये। वहीं श्री ओंकार ठाकुर ने अपने जन्म दिवस उपस्थित स्नेहियों का आभार मानते हुए बताया कि मन में किसी भावना या विचार आने पर उन्हें यथोचित शब्दरूप देना ही सृजन है। मैं अपने विचारों और इर्दगिर्द घटित घटनाओं से उत्पन्न भावों को ईमानदारी से कलमबद्ध करता हूँ, शायद मेरे ये प्रयास समाज के काम आ सकें ।
मुख्य अतिथि ठा राज बहादुर सिंह रज्जू भैया ने कहा कि नियति ने श्री ठाकुर को साहित्य के माध्यम से समाज सेवा का दायित्व सौंपा है । विशिष्ट अतिथि श्री गोकर्ण नाथ शुक्ल ने उन्हें कहानी, उपन्यास एवं संपादन कौशल के माध्यम से साहित्य को ईमानदारी से श्री मंडित करने वाली सख्सियत बताया । मंचासीन श्री कामता सागर, रुद्रदत्त दुबे, मणि मुकुल एवं प्रो. राजेन्द्र तिवारी "ऋषि" ने भी अपने उद्बोधनों में श्री ठाकुर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला । इसके पूर्व विजय तिवारी "किसलय" ने श्री ओंकार ठाकुर के समग्र जीवन तथा लेखन के बारे बताया कि इनके फिरंगिया और पीला रूमाल दो उपन्यास, पुस्तकाकार बाल कवितायें, कहानियाँ, विज्ञान पर आधारित आलेख, देश के वरिष्ट साहित्कारों से ली गई भेंट वार्ताओं एवं देश की ख्यातिलब्ध पत्र-पत्रिकाओं में कहानी, कवितायें, आलेखों के प्रकाशन के अतिरिक्त सन १९६५ से १९८२ तक प्रकाशित हुई "शताब्दि" पत्रिका सहित दैनिक समाचार पत्र का संपादन इनका विशेष रूप से साहित्यिक योगदान है ।
इस अवसर पर राजेश पाठक प्रवीण, राजेन्द्र रतन, अभय तिवारी, आदर्श शर्मा, इरफान झाँसवी, पुरुषोत्तम जाली, विजय जायसवाल, रमाकांत गौतम, मोती शिवहरे सहित उपस्थित स्नेहियों ने श्री ठाकुर का अभिनंदन करते हुए जन्म दिवस की शुभकामनाएँ दी । कार्यक्रम का संचालन दीपक तिवारी एवं आभार प्रदर्शन गुंजन कला सदन के संस्थापक श्री ओंकार श्रीवास्तव ने किया ।









- विजय तिवारी "किसलय "

जन्मोत्सव अवसर के छाया चित्र -

6 टिप्‍पणियां:

  1. आलेख पढ़ और चित्र देखकर अच्छा लगा "किसलय" जी। प्रो. जवाहर लाल चौरसिया जी "तरुण" ने साहित्यकार श्री ओंकार ठाकुर के ७७वें जन्मोत्सव पर जो कहा वह भी शानदार है। उन्हें हृदयिक शुभकामनाएं और उनके स्वस्थ जीवन के मंगलभाव..।



    आपका

    "रामकृष्ण"

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  2. अरे, इतना वृहद आयोजन हुआ..हमको बता दिया करिये तो कम से कम फोन पर पहुँच जायें और शिरकत करें. श्री ओंकार ठाकुर जी को पुनः बधाई एवं शुभकामनाएँ.

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  3. क्या बतलाएँ डॉ. साहब उसी दिन जो पॉलीपाथर में देवाशीष शुक्ला के अंतिम संस्कार में गए थे। अपने जो सुनील शुक्ला जी हैं ना, उन्हीं का भतीजे थे वो। सुनील साहब ने ही दाह संस्कार किया था। खैर दादा को हमारी तरफ़ से बिलेटेड बधाई ज़रूर दीजिए। जल्द आपसे फ़ोन पर बात करूँगा।

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  4. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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