रविवार, 13 जुलाई 2008

मातृ सेवा 



क़र्ज़ माँ का है बड़ा, जानते ये हम सभी /

हैं बहुत उपकार इसके, हम न गिन सकते कभी //

कष्ट में देखे हमें तो, रोएँ इसके भी नयन /

सारे दिन की छोड़िए, रात न करती शयन //

आज भी सारे जहां का , एक ही मंतव्य है /

मातृ सेवा हर युगों का, श्रेष्ठतम कर्तव्य है //

ईशभक्ति में न शक्ति, माँ की सेवा में जो है /

स्वर्ग न आनंद देता, मातृ सेवा में वो है //

अपनी माँ को भूलता जो, वह बड़ा ख़ुदग़र्ज़ है /

मातृ सेवा इस जहां में , हर मनुज का फ़र्ज़ है //


- विजय तिवारी "किसलय"

जबलपुर, इंडिया

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