गुरुवार, 2 अप्रैल 2009

दोहा श्रृंखला [दोहा क्र ३७ से ४३]



नव रात्रि पर्व पर मैया के ७ दोहे .....


मैया पर विश्वास रख, कर्म करे जो नेक .
उनका आदर भाव से, जग करता अभिषेक

अंबे माँ सुखदायनी, ममता का प्रतिरूप.
दिखें उन्हें सब एक से, आम, खास या भूप.

माँ की पूजा-भक्ति से, फलते सुफल अनेक .
बिन माँगे मिलते सदा, सन्मति, बुद्धि, विवेक .

पूरी करती कामना, हरती दुख-संताप .
माँ के पूजन-भजन का, जग में यही प्रताप ..

माँ की पूजा-अर्चना, श्रद्धा से यश गान ।
करे सुनिश्चित भक्त का, दुःख-दारिद्र्य निदान ।।

माँ दुर्गा के नौ दिवस, नित नव रूप अनूप ।
पूजन सुख की छाँव दे , लगे न दुःख की धूप॥

जिनके पावन नाम को, रखूँ सदा मैं याद ।
ऎसी जग जननी मेरी, पूरी करे मुराद ॥
विजय तिवारी " किसलय

5 टिप्‍पणियां:

  1. पर्व विशेष के उम्दा दोहे. आभार.

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  2. 'अंबे माँ सुखदायनी, ममता का प्रतिरूप.
    दिखें उन्हें सब एक से, आम, खास या भूप'
    - सुन्दर.

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  3. Madhaw Tiwari ने कहा…
    Aapke Bhai Ki Bhabhi Ki...
    Saas Ke Bhai Ki Biwi Ki...
    Saas Ke Pati Ke Jamai Ke...
    Pote Ki Maa Ki Nanand Ka
    Bhai Apka kaun Hai???

    jawab dijiye

    March 30, 2009 11:21 AM
    बवाल ने कहा…
    बहुत ही उम्दा दोहे, हमेशा की तरह किसलय साहब, क्या कहना ! जय मातेश्वरी ।

    March 30, 2009 11:21 AM
    नरेश सिह राठौङ ने कहा…
    बहुत अच्छे दोहे है माँ की भक्ती से ओत प्रोत है |

    March 31, 2009 2:05 AM
    sandhyagupta ने कहा…
    Bhakti ke ras me rang diya aapne.Aabhar.

    April 1, 2009 1:34 AM
    वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…
    बहुत सुन्दर दोहे....बधाई.

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