गुरुवार, 8 जनवरी 2009

देश वासियो ! अब देशप्रेम करो, दिखाओ मत .....

आज जब देश के अन्दर और बाहर आतंक को बढावा देने वाले तत्व सक्रिय हैं. हमारे देश के अन्दर ही आतंकी गतिविधियाँ आए दिन बढ़ रहीं हैं. हम जानते भी हैं कि ये विदेशियों की करतूतें हैं , तब भी क्या बिना जयचंदों के इतना सब कुछ सम्भव है ? कब तक महाराणा प्रताप, लक्ष्मी बाई, भगत सिंह , चन्द्र शेखर और सुभाष जैसे सपूत देश के स्वाभिमान की रक्षा करते रहेंगे ? क्या हमारे देश की यही नियति है कि हम शहीद होते रहें और अँगुलियों पर गिने जा सकने वाले जयचंद आतंकियों का साथ देते रहें ?
दूसरी और हमारे ही देश में ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो अपने स्वार्थ के लिए, पैसों की भूख मिटाने के लिए अपना ईमान-धरम, ह्त्या-लूटपाट के आगे भी कहें तो देश को बेचने से भी नहीं हिचकेंगे . तीसरी अहम् बात बड़ी चौंकाने वाली है कि हमारे देश में एक ऐसा बड़ा वर्ग भी है जो १५ अगस्त, २६ जनवरी और २ अक्टूबर को ऐसा देशप्रेम दिखाता है जैसे उनसे बड़ा देशभक्त और कोई दूसरा हो ही नहीं सकता.. इस तरह के मौकापरस्त ऐसा कोई भी अवसर नहीं छोड़ते , चाहे वो संकट की घड़ी हो, खुशी के पल हों या दुःख की घडियाँ . ये हर जगह अपने देश प्रेम का ढिंढोरा पीटते नज़र आते हैं. जबकि सत्यता ये है कि ऐसे लोगों का ये दिखावा सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने निजी स्वार्थ के लिए ही होता है...ये मोहल्ले में लगी आग को बुझाने के लिए उसे पड़ोसी के घर तक पहुँचने का इंतज़ार करने वाली कहावत को चरितार्थ करते हैं .

मुद्दे की बात ये है कि ये सारे लोग इस तरह की विचारधारा को पाल कर ख़ुद नहीं जानते कि वे देश का कितना बड़ा नुकसान कर रहे हैं . ऐसे लोगों को ये बात समझना होगी कि उन्हें अपने देश से , अपनी माटी से , जहाँ ये पले, बढे और अपनी पहचान पाई है उस देश से सच्चा प्रेम करना उनका उतना ही बड़ा दायित्व है जितना कि अपने माँ-बाप और बच्चों से प्रेम करना है. क्या हम अपनों से दिखावा करते हैं ? क्या हम अपने बच्चों से विशवास घात करते हैं? हमें तो खुशी तब होती है जब वह प्रगति करते हुए दिखता है , वह अपनी पहचान बनाता है. आज हमें बुराईयों की आँधी से देश के दिए को मह्फूस ही नहीं उसकी अच्छाईयों की रौशनी को सारी दुनिया में फैलाना है .
ये बातें आज के बदलते परिवेश और मौजूदा हालात में और भी जरूरी हो जाती हैं कि देश का हर बच्चा-बूढा एक सच्चे देशभक्त और भारत माँ की संतान होने के नाते उस हर करतूत का मुँहतोड़ जवाब देने को कटिबद्ध रहे जो देश की प्रगति , अमन-चैन और देश की सुरक्षा के आड़े आने की कोशिश करे । इसलिए देश वासियो ! अब देशप्रेम करो, दिखाओ मत .....
हम अपने छोटे छोटे स्वार्थों के कारण अपने देश को खोखला न होनें दें, देश के साथ दिखावा न करें , उसके साथ विश्वासघात न करें. आईये , हम सब अपनी सोच को बदलें और राष्ट्र को विश्व में वांछित पहचान दिलाने हेतु दृढ़ संकल्पित हों.
- विजय तिवारी "किसलय"

19 टिप्‍पणियां:

  1. main aapse sahmat hoon ji , deshprem dikhane ka waqt aa gaya hai...
    aapne bahut saarthakta se likha hai ..
    is amulay rachan ke liye badhai ..

    maine kuch nai nazme likhi hai ,dekhiyenga jarur.


    vijay
    Pls visit my blog for new poems:
    http://poemsofvijay.blogspot.com/

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  2. विजय जी
    अभिवंदन
    आपने मेरे आलेख का समर्थन करके यह
    सिद्ध कर दिया है कि आज वाकई देशप्रेम
    को आत्मसात किया जाना चाहिए .
    आपका
    -विजय

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  3. लोगो में देशप्रेम का जज्बा होना चाहिए . बहुत बढ़िया प्रेरक अभिव्यक्ति . धन्यवाद.

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  4. महेंद्र भाई
    आपका स्नेह है की आप मेरी रचनाओं को
    पढ़ कर मुझे सदैव प्रोत्साहित करते हैं
    - विजय

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  5. बहुत सही कहा
    इस देश को ऐसे ही विचार-दर्शन देना ज़रूरी है
    आज जब देश के अन्दर और बाहर आतंक को बढावा देने वाले तत्व सक्रिय हैं. हमारे देश के अन्दर ही आतंकी गतिविधियाँ आए दिन बढ़ रहीं हैं. हम जानते भी हैं कि ये विदेशियों की करतूतें हैं , तब भी क्या बिना जयचंदों के इतना सब कुछ सम्भव है ?
    ये टिप्पणी सटीक है
    जारी रहे जी लेखन

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  6. यह जानकर बेहद खुशी हुई कि जबलपुर के कई वरिष्ठ लोग ब्लॉगिंग में मशरूफ है। जबलपुर से मेरा चोली दामन का साथ है। मेरे पापा आचार्य रजनीश के शिष्यों में से एक थे। उनके साथ पूना के कम्यून जाने का मौका मिला है। पापा के कई दोस्त हैं जो इन गौरवशाली संस्थानों से जुड़े हैं। जबलपुर के हर कौने में मेरा एक रिश्ता महकता नजर आता है।

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  7. इस प्रकार की भावना जनता में पैदा करने के लिए सही नेतृत्व की कमी है. आपके विचारपूर्ण लेख के लिए साधुवाद.

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  8. विजय जी,
    नमस्कार.
    आपकी मेरे ब्लॊग पर टिप्पणी और तारीफ़ के लिये बहुत शुक्रिया....मुझे भी अफ़सोस है कि मै ठीक से मिल नही पाई...
    आपका लेख पसंद आया..

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  9. रचना जी
    नमस्कार
    प्रत्युत्तर के लिए आभार
    आपको मेरा लेख पसंद आया.
    ये मेरा सौभाग्य है कि आप मेरे ब्लॉग पर आए
    और प्रतिक्रिया व्यक्त की
    आपका
    -विजय

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  10. हेम जी
    हार्दिक अभिवंदन
    आपने अपनी प्रतिक्रिया के
    माध्यम से सही बात दोहराई है
    मैं आपका आभार व्यक्त करता हूँ
    - विजय

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  11. महेंद्र भाई
    सादर अभिवंदन
    आपके द्बारा दी गई प्रतिक्रिया
    मेरे लिए महत्वपूर्ण होती है
    - विजय

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  12. गिरीश जी
    आपने मेरे आलेख के माध्यम से भेजे गए संदेश को सही पहचाना ,,,,
    मैं भी यही कह रहा हूँ कि हमें अपना
    आतंरिक सुरक्षा चक्र मजबूत बनाने की सख्त आवश्यकता है.
    - विजय

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  13. श्रुति जी
    नमस्कार
    सर्व प्रथम प्रत्युत्तर के लिए आभार
    जबलपुर के रिश्तों से आपके अटूट संबंधों को
    जान कर ऐसा प्रतीत हुआ कि एक ब्लॉगर से
    नही बल्कि मैं अपने परिवार के एक और
    सदस्य से मिला हूँ.
    बहुत अच्छा लगा,
    आगे भी नज़दीक बने रहिये
    - विजय

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  14. निश्चित ही ऐसे प्रेरक आलेखों की आवश्यक्ता है. देश का भविष्य इन्हीं ज़ज्बों पर टिका है. आपका आभार. अलख जगाते रहिये कलम के माध्यम से.

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  15. apka aalekh bhut hi prernadayak hai.
    bhart ki ajadi ke samay bhi hmare desh ke mhan sahitykaro ne apni lkhni se janmanas me deshprem ki bhavna ka sanchar kiya tha aur log us ladai me apna tan,man aur dhan dekarkud pde the .aaj bhi ase hi lekho kvitao aue any shakt madhym ki jarurat hai ,jabki aaj ke yug me apni bat khne aur uski prtikriya ke anek sadhan mojud hai.ase hi aap lkhte rhe.
    hari oom
    shobhana

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  16. शोभना जी
    सादर अभिवंदन
    आपकी टिप्पणी पढ़ कर हार्दिक आनंदानुभूति हुई कि
    आज भी ऐसे साहित्यकार हैं जो सूक्ष्मता से पढ़-गुनकर साहित्य का
    मान रखते हैं, उस पर सार्थक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं.
    आपका आभार
    -विजय

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  17. समीर जी
    सादर अभिवंदन
    आप जैसे सजग साहित्यकारों,समीक्षकों,ब्लागरों की सक्रियता का ही ये परिणाम है कि हम ऐसा कुछ लिखने कि प्रेरणा मिलती है जो समाज को सही दिशा प्रदान कर सके.
    - विजय

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  18. विजय जी ,
    आप के इस लेख में आप के विचारों से मैं भी सहमत हूँ..आज वक्त भावुक हो कर आंसूं बहाने का नहीं बल्कि practicle करके दिखाने का है.
    बहुत अच्छा लेख है.

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  19. अल्पना वर्मा जी
    अभिवंदन
    आपने मेरे आलेख को पढ़ा, अच्छा लगा. और उससे भी ज्यादा अच्छा ये लगा की आपने सही पहचाना कि
    आज वक्त भावुक हो कर आंसूं बहाने का नहीं है ..
    आभार
    - विजय

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